22 साल की श्रीधन्या सुरेश बनी पहली आदिवासी महिला आईएएस ऑफिसर

पहली आदिवासी महिला बनी आईएएस अधिकारी
पहली आदिवासी महिला आईएएस अधिकारी 22 साल की श्रीधन्या सुरेश बनी ! केरल में एक जिला है जिसका नाम वायनाड है कांग्रेसी नेता राहुल गांधी भी इस जिले से सांसद भी हैं इस जिले में कई सुंदर-सुंदर मस्जिदें हैं और एक आदिवासी इलाका भी है जो कि अपनी खूबसूरती के लिए काफी मशहूर है इस इलाके में कई आदिवासी मजदूर काम करते हैं और छोटे मोटे व्यवसाय करके अपने परिवारों का पालन पोषण करते हैं ।
आज हम इसी आदिवासी इलाके से बहुमुखी प्रतिभा से संपन्न एक बेटी के बारे में बात करने जा रहे हैं जिसने अपने माता-पिता का नाम ऊंचा कर दिया है। यहां के इलाके में रहने वाले आदिवासियों के बच्चे जंगलों में रहकर अपने मां बाप के साथ उनके व्यवसाय में मदद करते हैं या मजदूरी करते हैं।

पिता बेचते हैं तीर धनुष
पहली आदिवासी महिला आईएएस ऑफिसर श्रीधन्या के पिता का नाम सुरेश है और वह भी आदिवासी है। मगर श्रीधन्या सुरेश के पिता ने कभी अपने बच्चों से मजदूरी नहीं करवाई बल्कि उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित किया और श्रीधन्या सुरेश ने सभी मुश्किल हालातों को पार करते हुए अपना तथा अपने पूरे समुदाय का नाम रोशन कर दिया है । जी हां श्रीधन्या सुरेश केरल जिले की पहली महिला आदिवासी आईएएस अधिकारी होने का गौरव हासिल हुआ है। श्रीधन्या के पिता मजदूरी करते हैं। और तीर धनुष बेचने का काम भी किया करते हैं।

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मनरेगा स्कीम पर टिका था परिवार का खर्चा
श्रीधन्या सुरेश का बचपन बड़ी कठिनाइयों से गुजरा यहां तक की उनके परिवार का खर्चा भी मनरेगा स्कीम पर टीका था। मगर सारी कठिनाइयों से जूझने के बाद भी श्रीधन्या ने जूलॉजी से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद इन्होंने कोझिकोड जिले के एसटी जोसेफ कॉलेज में एडमिशन लिया । इसके बाद उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन किया।
श्री धन्य ने परिवार को आर्थिक तंगी से जूझता हुआ देखकर पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद अपने जिले वायनाड के एक आदिवासी हॉस्टल में बतौर वर्डन भी काम किया। मगर इस सभी के बावजूद उन्होंने अपने पढ़ाई के जज्बे को कायम रखा। इसी दौरान श्री धनिया को एक बार आईएएस अधिकारी श्री राम शिवा से बातचीत करने का मौका मिला और कलेक्टर ने श्रीधन्या को यूपीएससी की परीक्षा में बैठने के लिए प्रेरित किया।

तिरुवंतपुरम से की कोचिंग
श्री धनिया ने जिले के आईएएस अधिकारी-श्रीराम शिवा से बातचीत हो जाने के बाद यह फैसला लिया कि वह यूपीएससी की परीक्षा में ना केवल बैठेंगी बल्कि उत्तीण भी होंगी।
इसके बाद वह सिविल सर्विस परीक्षा के लिए कोचिंग में पढ़ने तिरुवंतपुरम गई । जिसके बाद इनका upsc मे चयन भी हो गया है। और वह अपने राज्य तथा जिले की पहली महिला आदिवासी आईएएस ऑफिसर बन गई है। उनके पिता का कहना है कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है।



