देश

समय का सदुपयोग

                                                       समय, समय क्या है? चलती हुई घड़ी या बीता हुआ कल। नहीं, समय आज है, समय अब है। जो समय नष्ट कर रहे हैं, वह स्वयं को नष्ट कर रहे हैं। उन्हें समय के प्रभाव का लेश मात्र भी ज्ञान नहीं है। वे समय के महत्व से अनभिज्ञ हैं। ऐसे मनुष्य समय का सदुपयोग नहीं , दुरूपयोग करते हैं। बड़े-बड़े चौराहों पर बीड़ी-सिगरेट, लूट-पाट एवं हानिकारक वस्तुओं को प्रयोग में लेकर समय बर्बाद करते हैं।
समय के आगे न चले, कभी किसी का जोर। रचता है ये खेल स्वयं का, बिना किए कोई शोर।।
आप सभी पाठक, निःसंदेह इस बात से परिचित होंगे, कि हमारा राष्ट्र एक युवा देश है एवं मात्र एक युवा देश ही नहीं, संपूर्ण विश्व में सबसे अधिक युवा जनसंख्या, भारत में है। यह निश्चित ही अत्यधिक गौरवान्वित कर देने वाली बात है।
               किन्तु, इसके विपरीत जब यही युवा अपना बहुमूल्य समय स्वयं के साथ देश को सशक्त करने की जगह, घंटों सोशल मीडिया पर, उपभोक्तावादी संस्कृति के आवेश में आकर विभिन्न प्रकार की वेबसाइट पर,  गेम्स खेलने पर, आदि अन्य व्यर्थ गतिविधियों पर, बिना किसी सीमा को निर्धारित किए समय खर्च किए जाता है, तो यही 3,560 लाख युवा गौरव नहीं, देश के लिए संकट बनने लगता है। और इसका कारण है, समय के महत्व को नहीं पहचान पाना एवं कर्त्तव्य राह से विमुक्त हो कर, बिना कोई भी परेशानी झेले, सब हाथ में मिलने की कामना करना।
       परन्तु विश्व में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अपना एक-एक पल समाजसेवा एवं वातावरण को शुद्ध करने में बिताते हैं। भारत के कई युवाजन, प्रतिदिन कुछ नया सीख कर स्वयं को अपने एवं मातृभूमि के उज्जवल भविष्य के लिए गढ़ रहे हैं, इसी सोशल मीडिया का प्रयोग वे निःसहाय लोगों की सहायता व अन्य उपयोगी कार्यों के लिए कर रहे हैं। इसका वर्तमान में सबसे लोकप्रिय उदहारण हैं, अभिनेता सोनू सूद, टाटा कंपनी अध्यक्ष रतन टाटा एवं अन्य ज्ञात व अज्ञात जन जो अपना समय इस विश्व को पहले से बेहतर बनाने में निवेश करते हैं और आगे चल कर यही सब हमारी प्रेरणा बनते हैं।
 प्रभु ने समय मनुष्य को नष्ट नहीं, उपयोग में लाने के लिए दिया है। समय हीरे, सोने, जवाहरत, मोती, माणिक इन सब में प्रथम है। जो समय को पहचान जाता है अर्थात वह वर्तमान जान जाता है। समय एक ऐसी वस्तु है जो वापस नहीं आ सकती। अगर हम बुढ़ापे में प्रवेश कर लें तो फिर हम कभी बचपन में नहीं जा सकते।

                   जो  चीज़ हमें समय सिखा सकता है वह और कोई नहीं सिखा सकता। समय हमें दुःख भी देता है , सुख भी। समय हमें कठिन परिस्थिति से जूझना एवं उत्सव को मनाना सिखाता है। जो समय से छिपते  हैं ,समय भी उन्हें नहीं खोजता समय अनमोल एवं बहुमूल्य वस्तु है। 

 

                                       जो समय का सदुपयोग कर लेते हैं , वह उच्च श्रेणी पर विराज जाते हैं, जैसे आई. ए. एस, कर्नल , राष्ट्रीय खिलाड़ी, मैनेजर, कंपनी अध्यक्ष, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति इत्यादि। भगवान ने समय नि :शुल्क बांटा है परन्तु मानव उसे खर्च कर-कर के बर्बाद कर रहा है। कुछ लोगों का समय आलतु-फालतू कार्यों में ही नष्ट हो जाता है , उनका जीवन व्यर्थ ही चला जाता है। और बाद में  वे लोग इसका पश्चाताप भी नहीं कर पाते।
        ऐसे लोगों के लिए अंत में बस यही सुनने को रह जाता है कि “अब पछताय होत का, जब चिरिया चुग गई खेत”। कुछ लोग समय को टालते रहते हैं- नहीं आज, नहीं कल यही करते-करते अपना बहुमूल्य जीवन नष्ट कर देते हैं। इसलिए कहा गया है कि “काल करे सो आज कर, आज करे सो अब, पल में परलय होयगी, बहुरी करेगा कब “। अंत में इस लेख के द्वारा बस यही कहना चाहूंगी कि समय को नष्ट न करो, इसे बचाओ। प्रभु का दिया हुआ जीवन, सुखमय तरीके से बिताओ।
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