“राजनीति के कारण दम तोड़ता लोकतंत्र “
“राजनीति के कारण दम तोड़ता लोकतंत्र “
आज पूरा विश्व कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से जूझ रहा है। लेकिन भारत में ये महामारी अपने चरम सीमा पर है। देश कि जनता खौफ के साये में जी रही हैं फिर भी हमारे देश के नेता इस महामारी पर राजनीति कर रहे है। एक तरफ जहां सरकार इस महामारी के सामने पूरी तरह से लाचार दिखाई दे रही है तो वही दुसरी तरफ अलग अलग राजनीतिक दल में आरोप प्रत्यारोप का दौर भी काफी जोर पकड़ रहा है। देश की जनता आज मूलभूत सुविधाओं के लिये संघर्ष कर रही है फिर भी हमारे देश के बुद्धिजीवी नेताओं को अपने दल के चुनाव के लिए रैलियां करनी है,दल का प्रचार-प्रसार करना महत्वपूर्ण लग रहा है।।
सर्वोपरि जनता
कहने को भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है जहा जनता जनार्दन ही सबसे सर्वोपरि है लेकिन देश में जो समस्याए है उन्हें देख कर ये कहना गलत नही होगा कि यहाँ राजनीति ही सबसे ऊपर है।
भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है लेकिन यहां के राजनीतिक दलों ने धर्म,जाति को ही अपने चुनाव लड़ने का मुद्दा बना रखा है। यहा अगर सत्ता में आना है तो धर्म को मुद्दा बनाये चाहे वो बाबरी मस्जिद का मुद्दा हो या चाहे राम मंदिर का और फिर देखिए कैसे धर्म के ठेकेदार राजनीति करते है।
यह बात बिल्कुल सही है कि पिछ्ले कुछ वर्षों मे भारत ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान बनाई है और देश कि इस छवि को मजबूत बनानेके लिये सरकार ने कोरोना काल में अपने पड़ोसी देशों के साथ मित्रता दिखाते हुये कोरोना टीकाकरण कि कई खेप दुसरे देशो को भिजवा चुका है।
लेकिन जब अपने देश कि जनता के टीकाकरण का समय आया तो देश मे टीका का ही अभाव हो गया और आज स्थिति ऐसी है कि देश के बड़े बड़े अस्पतालों मे बिस्तर का अभाव,ओक्सिजन कि किल्लत और संसाधनों की कमी के कारण देश की जनता जान गंवाने को मजबुर है।
अच्छे दिनों की आस
चुनाव के समय जो राजनीतिक दल जनता को बहला फुसला कर सत्ता में आने के लिए झूठे वादे करती है और सत्ता मे जाने के बाद उन्हीं वादों को वो भूल जाती हैं। सरकार लोगो को अच्छे दिन लाने का जो भरोसा देती है उसी भरोसे को तोड़ कर जनता को महंगाई की मार,आर्थिक मन्दी,और कोरोना जैसी महामारी मे स्वास्थ सेवाओं की किल्लत का नजराना पेश करती है ।।
वैसे तो सरकार देश की स्थिति को सुधारने में काफी प्रयासरत है और इसके लिये सरकार ने बहुत सारी योजनाएं भी शुरू की है जैसे कि ‘मेक इन इंडिया ‘ या फिर ‘आत्मनिर्भर भारत ‘ लेकिन फिर भी सरकार देश की अर्थव्यवस्था को सफल बनाने में नाकाम होती दिख रही है,क्योंकि वैश्विक महामारी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से बिखेर कर रख दिया है जो कही ना कही राजनीति के परिणाम का ही नतीजा है। देश में राजनीति ने नेताओं को इतना अंधा कर दिया है की वो भूल गए है की वो एक लोकतांत्रिक देश में रहते हैं जहां जनता ही सब कुछ है, जिस जनता ने उन्हें अपने सिर का ताज बनाया है वही समय आने पर उन्हें अर्श से फर्श तक का सफर तय करा सकती है।
अगर देश को अच्छे दिन की सौगात देनी है तो बहुत से मुद्दे ऐसे हैं जिस पर सरकार निर्णायक कदम उठाये तो देश की प्रगति हो सकती है,उदाहरण के तौर पर
- शिक्षा से समबन्धित मुद्दे

- घरेलू हिंसा के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए
- धर्म और जाति से परे राजनीतिक दलों को देश के विकास पर ध्यान देना होगा
- नेताओं को द्वेषपूर्ण भाषण देने से बचना होगा
- स्वास्थ्य के क्षेत्र मे विकास करना होगा
आजकल के हालात को देखते हुये सभी राजनीतिक दलो को चाहिए की वो एक दुसरे पर आरोप लगाना छोड़कर एकजुट हो जाए और देश को इस वैश्विक महामारी से उबारने मे सरकार की सहायता करे।।
वैसे तो सरकार अपने जुम्लेबाजी और मन की बात से पूरी कोशिश कर रही है इस हालात से निपटने का।
लेकिन क्या सरकार के सिर्फ जुमलेबाजी या मन की बात से जनता की समस्याओं का समाधान हो पायेगा ?
ये बहुत ही ज्यादा चिंता का विषय है, जिस पर सरकार कर साथ साथ जनता को भी सोचना होगा क्युकी हमारा आने वाला भविष्य हमरी आज की परेशानियों का ही नतीजा होगा।।




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